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छपरा में तरबूज, फाइल और नमक की बोरियों में छिपी मिली शराब, 1591 लीटर से ज्यादा खेप जब्त

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बिहार के सारण जिले में उत्पाद विभाग ने शराब तस्करी के अनोखे तरीके का खुलासा किया है। ट्रेन और पिकअप वैन से तरबूज, फाइलों और नमक की बोरियों के बीच छिपाकर लाई जा रही 1591 लीटर से अधिक शराब और बीयर जब्त की गई। एक आरोपी गिरफ्तार हुआ है।

छपरा/आलम की खबर: बिहार में शराबबंदी के बीच तस्कर कानून को चुनौती देने के लिए अब ऐसे-ऐसे तरीके अपना रहे हैं, जिन्हें देखकर जांच एजेंसियां भी हैरान रह जा रही हैं। सारण जिले के छपरा में उत्पाद विभाग ने शराब तस्करी के एक बेहद चौंकाने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जहां तस्करों ने विदेशी शराब और बीयर की खेप को छिपाने के लिए तरबूज, दफ्तरी फाइलों के कार्टन और नमक की बोरियों का सहारा लिया। दो अलग-अलग जगहों पर हुई कार्रवाई में विभाग ने कुल 1591 लीटर से अधिक शराब और बीयर बरामद की है। इस दौरान एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है, जबकि पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए पूछताछ और छानबीन तेज कर दी गई है।

यह मामला सिर्फ एक बरामदगी नहीं, बल्कि इस बात का भी संकेत है कि शराब तस्करी में शामिल गिरोह अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर नए और चालाक हथकंडे अपना रहे हैं। कभी एंबुलेंस, कभी पेट्रोल टैंक, कभी प्याज की बोरी और अब गर्मी के मौसम में तरबूज और नमक जैसी सामान्य चीजों को तस्करी का कवच बनाया जा रहा है। इससे साफ है कि तस्करों ने पुलिस और उत्पाद विभाग की निगरानी से बचने के लिए अपनी रणनीति लगातार बदलनी शुरू कर दी है।

सोनपुर स्टेशन पर खुला तस्करी का नया खेल

उत्पाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि सोनपुर स्टेशन के रास्ते अवैध शराब की खेप पहुंचाई जा सकती है। सूचना मिलते ही विभाग की टीम ने वहां विशेष जांच अभियान चलाया। ट्रेन की तलाशी के दौरान कुछ सामान अधिकारियों को संदिग्ध लगा। पहली नजर में यह सामान्य माल जैसा दिख रहा था, लेकिन जब टीम ने गहराई से जांच शुरू की, तो पूरा मामला खुलकर सामने आ गया।

तलाशी में पाया गया कि तरबूजों के बीच और दफ्तरी फाइलों के कार्टन के भीतर विदेशी शराब और बीयर की बोतलें छिपाकर रखी गई थीं। इतनी सफाई से पैकिंग की गई थी कि ऊपर से देखने पर किसी को शक तक न हो। लेकिन विभाग की सतर्कता ने तस्करों की पूरी योजना को वहीं ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई में कुल 31.650 लीटर विदेशी शराब और बीयर बरामद की गई।

यह तरीका इसलिए और भी चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि गर्मी के मौसम में तरबूजों की ढुलाई आम बात है। तस्करों ने इसी सामान्य दृश्य का फायदा उठाने की कोशिश की, ताकि किसी को संदेह न हो। लेकिन विभाग की टीम ने सिर्फ बाहरी शक्ल-सूरत पर भरोसा करने के बजाय हर संदिग्ध माल की बारीकी से जांच की और यही सतर्कता इस सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी।

नमक की बोरियों के नीचे मिली 1560 लीटर विदेशी शराब

पहली कार्रवाई के बाद उत्पाद विभाग ने दूसरी बड़ी सफलता एक पिकअप वैन की जांच में हासिल की। यह वाहन ऊपर से देखने में पूरी तरह सामान्य लग रहा था और उसमें नमक की बोरियां लदी हुई थीं। पहली नजर में ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वाहन रोजमर्रा की घरेलू या थोक सप्लाई का हिस्सा है। लेकिन जांच टीम को इस वाहन की गतिविधि और माल ढुलाई पर संदेह हुआ।

जब वैन की गहन तलाशी ली गई, तो नमक की बोरियों के नीचे छिपाकर रखी गई भारी मात्रा में विदेशी शराब बरामद हुई। अधिकारियों ने जब पूरा माल निकलवाया, तो वहां से 1560 लीटर विदेशी शराब मिली। यह बरामदगी इस बात की गवाही देती है कि तस्करों ने इस खेप को पूरी योजना के साथ छिपाया था और उन्हें भरोसा था कि नमक की बोरियां पुलिस और उत्पाद विभाग की नजर को भ्रमित कर देंगी।

तस्करों की यह सोच भी सामने आई कि नमक की वजह से शराब की गंध दब जाएगी और चेकिंग के दौरान संदेह कम होगा। लेकिन विभाग की पैनी नजर और सघन तलाशी ने उनके इस जुगाड़ को भी बेकार कर दिया। इतनी बड़ी मात्रा में शराब की बरामदगी से यह भी संकेत मिलता है कि यह खेप किसी छोटे स्तर की नहीं, बल्कि संगठित सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा थी।

एक आरोपी गिरफ्तार, पूरे नेटवर्क की तलाश शुरू

पिकअप वैन से शराब बरामद होने के बाद मौके से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। अब उससे पूछताछ कर यह जानने की कोशिश की जा रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब कहां से लाई जा रही थी, इसे किन रास्तों से बिहार में प्रवेश कराया गया और छपरा या आसपास के किन ठिकानों पर इसकी डिलीवरी होनी थी।

जांच एजेंसियों के लिए अब सबसे बड़ा लक्ष्य सिर्फ जब्त शराब तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके पीछे काम कर रहे पूरे गिरोह तक पहुंचना है। अक्सर ऐसे मामलों में ड्राइवर, हेल्पर या मौके पर पकड़ा गया व्यक्ति सिर्फ नेटवर्क की निचली कड़ी होता है, जबकि असली संचालक पर्दे के पीछे रहते हैं। यही वजह है कि विभाग अब सप्लाई चेन, रूट, बुकिंग पैटर्न और संपर्कों की गहराई से जांच कर रहा है।

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शराबबंदी के बाद तस्करों की बदलती चालें

बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से ही तस्करी का नेटवर्क लगातार नए रास्ते और नए तरीके तलाशता रहा है। पहले शराब की खेप को ट्रकों, निजी वाहनों और सीमावर्ती इलाकों के जरिए भेजने की कोशिश होती थी। लेकिन जैसे-जैसे जांच एजेंसियों ने निगरानी बढ़ाई, वैसे-वैसे तस्करों ने भी अपने तौर-तरीके बदलने शुरू कर दिए।

कभी दूध के टैंकर, कभी एंबुलेंस, कभी पेट्रोल टैंक, कभी प्याज की बोरियां और अब तरबूज, फाइल और नमक—ये सारे तरीके इस बात का संकेत हैं कि शराब तस्करी अब सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित और तकनीकी रूप से चालाक नेटवर्क में बदलती जा रही है। इसका मकसद सिर्फ शराब पहुंचाना नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों को भ्रमित करना और कानूनी कार्रवाई से बच निकलना भी है।

रेलवे और सड़क मार्ग दोनों बने निशाना

इस ताजा मामले की सबसे अहम बात यह है कि तस्करों ने सिर्फ सड़क मार्ग ही नहीं, बल्कि रेलवे रूट का भी इस्तेमाल करने की कोशिश की। इसका मतलब यह है कि शराब तस्करी का नेटवर्क अब बहु-स्तरीय हो चुका है और यह एक साथ कई रास्तों पर काम कर रहा है। ऐसे में सिर्फ हाइवे चेकिंग या सीमा जांच पर्याप्त नहीं रह जाती, बल्कि रेलवे स्टेशन, गोदाम, ट्रांसपोर्ट पॉइंट और छोटे मालवाहक वाहनों पर भी बराबर नजर रखनी जरूरी हो जाती है।

सोनपुर स्टेशन पर की गई कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि रेलवे मार्ग को भी अब तस्करी के लिए सुरक्षित विकल्प की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है। यही वजह है कि उत्पाद विभाग अब स्टेशन आधारित जांच को भी और सख्त करने के मूड में है।

उत्पाद विभाग ने बढ़ाई चौकसी

इस बड़ी बरामदगी के बाद उत्पाद विभाग ने जिले के सभी प्रमुख प्रवेश मार्गों, रेलवे स्टेशनों और संदिग्ध ट्रांसपोर्ट रूटों पर निगरानी और सख्त कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि अब सिर्फ सामान्य जांच से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर संदिग्ध वाहन, पैकेज और ढुलाई पैटर्न की गहराई से पड़ताल की जाएगी।

विभाग की चिंता यह भी है कि अगर इस तरह की खेप लगातार पकड़ी जा रही है, तो इसका मतलब यह भी है कि कुछ खेपें अब तक सफलतापूर्वक सिस्टम को चकमा देकर निकल भी रही होंगी। ऐसे में चुनौती सिर्फ कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि पूरे तंत्र को और ज्यादा चुस्त और खुफिया सूचनाओं पर आधारित बनाने की है।

सामान्य सामान की आड़ में बढ़ता अपराध

इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों को अपराध की ढाल बनाया जा रहा है। तरबूज, नमक और दफ्तरी फाइल जैसे सामान आम जिंदगी का हिस्सा हैं, लेकिन जब इन्हीं का इस्तेमाल अवैध धंधे को छिपाने के लिए होने लगे, तो यह जांच एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन जाती है।

ऐसे मामलों में सिर्फ पकड़ना ही काफी नहीं होता, बल्कि यह समझना भी जरूरी होता है कि तस्कर बाजार की किस सामान्य व्यवस्था का फायदा उठा रहे हैं। यही वजह है कि अब जांच का दायरा सिर्फ शराब बरामद करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लॉजिस्टिक चैन, बुकिंग नेटवर्क और स्थानीय सपोर्ट सिस्टम तक भी पहुंचेगा।

निष्कर्ष

छपरा में तरबूज, फाइलों और नमक की बोरियों के बीच छिपाकर लाई जा रही 1591 लीटर से अधिक शराब की बरामदगी ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में शराब तस्करी का नेटवर्क अब और ज्यादा चालाक, संगठित और खतरनाक रूप ले चुका है। तस्कर अब हर उस रास्ते और हर उस सामान का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो आमतौर पर संदेह से दूर रहता है।

हालांकि इस कार्रवाई ने यह भी साबित किया है कि अगर खुफिया सूचना मजबूत हो और जांच टीम सतर्क हो, तो तस्करों के कितने भी चालाक तरीके ज्यादा दिन तक नहीं चल सकते। अब जरूरत इस बात की है कि ऐसी कार्रवाई सिर्फ छिटपुट न रह जाए, बल्कि पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचकर उसे पूरी तरह तोड़ा जाए।

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